
दुग्धज्वर (Milk Fever)
सामान्यतः यह रोग अधिक दूध देने वाले पशुओं को व्याने के २-३ दिनों के अन्दर ही होता है परंतु ब्याने के पूर्व या अधिकत्तम उत्पादन
Kisankhetiganga.com विन्ध्य गंगे फार्मर प्रोड्यूसर कम्पनी लिमिटेड, पंजीकृत कार्यालय-डी-2/362, विकल्पखण्ड, गोमती नगर, लखनऊ-226010 के पूर्ण स्वामित्व का डोमेन नाम है। इस वेब साइट में कृषि जगत से जुड़ी विभिन्न जानकारियों का समावेश किया गया है, ताकि देश के कृषक वर्ग इससे लाभान्वित हो सकें। वेब साइट में जो भी जानकारी दी गयी है, वह विभिन्न पत्रिकाओं, कृषि शोध संस्थानों और विश्व विद्यालयों के प्रोफेसर/कृषि वैज्ञानिकों द्वारा लिखी गयी है, कुछ सामाग्री अन्य वेबासाइट से ग्रहण की गयी है, जिसके लये संस्था आभार व्यक्त करती है।
वर्ष 2013 में कृषि मंत्रालय, भारत साकार द्वारा कृषि के क्षेत्र में सहकारिता के माध्यम से आमूल-चूल परिवर्तन किये जाने हेतु कृषि उत्पादक संगठन (Farmer Producer Organization – FPO) का गठन पूरे देश में किये जाने हेतु विस्तृत दिशा निर्देश/पालिसी निर्गत किया गया। वर्तमान समय में FPO का गठन सोसाइटी एक्ट 1860 (यथा संशोधित), ट्रस्ट एक्ट 1882 तथा नयी बनी कम्पनी एक्ट 2013 के अन्तर्गत किये जाने की व्यवस्था की गयी है। Read More..

सामान्यतः यह रोग अधिक दूध देने वाले पशुओं को व्याने के २-३ दिनों के अन्दर ही होता है परंतु ब्याने के पूर्व या अधिकत्तम उत्पादन

पेट में रहने वाले ये कृमि परजीवी होते हैं, जो पशु का रक्त चूस कर उनको निरन्तर निर्बल बनाते रहते हैं। कृमि पशुओं की खुराक

यह बीमारी मक्खियों के काटने से फैलती है क्योंकि मक्खियों में इस रोगके कीटाणु पाये जाते हैं।लक्षण पशु खाना छोड़ देते हैं। तेज बुखार आता

जानवरों को खुरपका-मुहपका, गलघोंटू, लंगडा बुखार और संक्रामक गर्भपात (ब्रूसेल्लोसिस) जैसी संक्रामक बीमारियों से बचाने के लिएआवश्यक है कि पशुओं को नियमित रुप से टीके

यह पशुओं का एक संक्रामक रोग है जिसमें गाय/भैसो में गर्भपात और बांझपन की संभावना होती है। रोगी पशु के सम्पर्क में आने या उसकाकच्चा

यह एक संक्रामक रोग है जो रोग ग्रस्त पशुओं से स्वस्थ पशुओं में केवल संपर्क से ही नहीं, वरन् चारा, दाना,पानी तथा हवा से भी

यह रोग कर्नाटक, तमिलनाडु, आन्ध्रप्रदेश, महाराष्ट्र में विशेषकर और उत्तरी व पूर्वी भारत में कहीं-कहीं होता है। वर्षा ऋतु में इसका प्रकोपअधिक होता है। 6

यह एक जानलेवा संक्रामक रोग है, जो प्रायः गायों और भैंसों में वर्षा ऋतु में फैलता है, जिसमें मृत्यु दर अधिक होती है। बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों

यह थनों का संक्रामक रोग है, जो जानवरों को गंदे, गीले और कीचड़ भरे स्थान पर रखने से होता है | थन में चोट लगने,दूध

व्याने के समय पशु की देखभालव्याने के एक दिन पहले गाभिन पशु के जनन अंग से द्रव का स्राव होता है। पशु को बाधा पहुंचाये

नवजात बछड़े/बछियों में रोगों से लड़ने की क्षमता बहुत कम होती है।भैंस के बच्चे में यह क्षमता और भी कम होती है। खीस पिलानामाँ से

जन्म के तत्काल बाद बछड़े / बछिया की नाक और उसका मुंह साफकरें। नवजात बछड़े / बछिया की छाती पर धीरे-धीरे, मालिश करें जिससे किउसे
Copyright © 2020 Kisan Kheti Ganga